← Home 📄 भक्ति गायन लिरिक्स (PDF / Print) ↗
अभ्यास व स्मृतियाँ • PRACTICE ROOM & ARCHIVE

अभ्यास एवं प्रस्तुति रिकॉर्डिंग्स

श्री राम विजय महोत्सव 2026 में प्रस्तुत Music & Shlok और Instrumental अभ्यास सामग्री एवं रिकॉर्डिंग्स यहाँ उपलब्ध हैं।

📄 भक्ति गायन लिरिक्स शीट खोलें (A4 Print / PDF) ↗

Music & Shlok

Video sequence: 1, 2, 3… Future videos इसी क्रम में जोड़े जाएंगे.

Music & Shlok Practice Playlist

सभी गायन और श्लोक अभ्यास वीडियो की संयुक्त प्लेलिस्ट।

▶ Playlist YouTube पर खोलें

श्री राम स्तुति (Shri Ram Stuti)

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा, श्री हनुमान जन्मोत्सव और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से वाचन की जाने वाली वंदना।

▶ YouTube पर देखें

श्री राम दूत आञ्जनेय स्तोत्रम् (रं रं रं रक्तवर्णम्)

रामदूत हनुमान जी की स्तुति के अभ्यास के लिए.

▶ YouTube पर देखें

महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Mahishasura Mardini Stotram)

वंदना के साथ गायन-अभ्यास के लिए.

▶ YouTube पर देखें
+ Future videos इसी क्रम में नीचे जोड़े जाएंगे और उनके lyrics भी नीचे उसी क्रम में जोड़े जाएंगे.

Instrumental

Dhol, Drum और अन्य वाद्य अभ्यास.

Learn dhol tasha

Singles, Doubles, Triplets, Paradiddles और आगे जोड़े जाने वाले अन्य practice videos.

▶ Playlist YouTube पर खोलें

Lyrics

ऊपर के videos के exactly उसी क्रम में. Alternate paragraph bold हैं, individual lines नहीं.

🖨️ A4 Print / PDF शीट ↗

श्री राम स्तुति (Shri Ram Stuti)

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा, श्री हनुमान जन्मोत्सव और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से वाचन की जाने वाली वंदना।

॥दोहा॥श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमनहरण भवभय दारुणं ।नव कंज लोचन कंज मुखकर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छविनव नील नीरद सुन्दरं ।पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचिनोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानवदैत्य वंश निकन्दनं ।रघुनन्द आनन्द कन्द कोशलचन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलकचारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।आजानु भुज शर चाप धरसंग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकरशेष मुनि मन रंजनं ।मम् हृदय कंज निवास कुरुकामादि खलदल गंजनं ॥५॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमनहरण भवभय दारुणं ।नव कंज लोचन कंज मुखकर कंज पद कंजारुणं

श्री राम दूत आञ्जनेय स्तोत्रम्

रं रं रं रक्तवर्णं दिनकरवदनं तीक्ष्णदंष्ट्राकरालंरं रं रं रम्यतेजं गिरिचलनकरं कीर्तिपञ्चादि वक्त्रम् ।रं रं रं राजयोगं सकलशुभनिधिं सप्तभेतालभेद्यंरं रं रं राक्षसान्तं सकलदिशयशं रामदूतं नमामि ॥ 1 ॥

हं हं हं हंसरूपं स्फुटविकटमुखं सूक्ष्मसूक्ष्मावतारंहं हं हं अन्तरात्मं रविशशिनयनं रम्यगम्भीरभीमम् ।हं हं हं अट्टहासं सुरवरनिलयं ऊर्ध्वरोमं करालंहं हं हं हंसहंसं सकलदिशयशं रामदूतं नमामि ॥ 5 ॥

महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Mahishasura Mardini Stotram) — पहले 4 पद

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरतेत्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरतेदनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरतेशिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपतेरिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥

रामायण कथा गीत (हम कथा सुनाते राम...)

भगवान श्री राम के जीवन, उनके आदर्शों और उनकी जन्मभूमि अयोध्या की पावन कथा का बहुत ही सुंदर वर्णन (रवींद्र जैन द्वारा रचित एवं रामानंद सागर की 'रामायण' श्रृंखला का प्रसिद्ध गीत)।

हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की....

जम्बुद्वीपे, भरत खंडे, आर्यावरते भारतवर्षे,एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की,यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की,

हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की....

पार्वती गीत — "जब ज़िद पे आ गई पार्वती"

शुरुआतओम शंभू, शिव शंभू, भोलेनाथ।जब जिद पे आ गई पार्वती,पार्वती, पार्वती।समझाने पहुंचे सप्तऋषिसप्तऋषि, सप्तऋषि।

मुखड़ाकाय जिद कर-रही काय को हुमर-रही, काय जिद कर-रही काय को हुमर-रही, ऐसे वर के लाने, ऐसे वर के लाने।जाके सीस पे गंगा और गले में डाले फिर रहे सांप, जाके सीस पे गंगा और गले में डाले फिर रहे सांप।इतने सीधे-सादे हैं सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ सब कहते, भोलेनाथ।

अंतरा 1ना खपरा ना छपरा ना फूस की धरे मड़ैया, का खावे को धरो वहां बस रोवत रहत लड़ैया।भेष धरे अवधूत फिरे अब तुमसे का का कहे बिन्नूं, डोरा डांगर ले घूमे वे बिनकें कछुऐनैयां।

अंतरा 2जटा लटा ना कबहूं संबारे दीसत महा भयंकर, मुड़ें पे आधी चंदा और बेला पे घूमत शंकर।राम नाम के रसिया हैं वे और उन्हें क्या चाहने, कामदेव के मर्दनहारी घर-गुहस्थी क्या जानें।

समापनभोले बमभोले, भोले बमभोले। भोले बमभोले, भोले बमभोले।

Additional Practice Videos

Admin/backend से बाद में जोड़े गए published videos.

Loading additional videos…